अंग्रेजी में सुनें

सरिता अहलावत। श्रेय: सोनू गाँधी

ड्रोन ज़्यादातर सैन्य सेवाओं में उपयोग किये जाते हैं, लेकिन अब खोज और बचाव, और मौसम विश्लेषण जैसे विभिन्न कार्यों में इनका उपयोग किया जाने लगा है।

पिछले कुछ वर्षों में, ड्रोन बेहद लोकप्रिय हो गए हैं। यह काम को आसान करने का और तकनीकी और वैज्ञानिक उत्कृष्टता दिखाने का प्रमाण सिद्ध हुए हैं। ड्रोन को , तकनीकी संदर्भ में या औपचारिक रूप से मानव रहित हवाई वाहनों या मानव रहित विमान सिस्‍टम के रूप में जाना जाता है।

ये क्राफ्ट् सैन्य अभियानों से लेकर पैकेज वितरण तक के कार्यों में काफ़ी प्रभावशाली हैं। साथ ही, पिछले एक साल में राष्ट्रीय उपलक्षों पर ड्रोन्स ने देश का गौरव और सुंदरता का प्रतीक बन , आसमान को जगमगाने का काम भी बखूबी किया है। गणतंत्र दिवस में राष्ट्रपति भवन, और स्वतंत्रता दिवस परआईआईटी (IIT) दिल्ली परिसर में , जिसने भी ड्रोन शो देखा, उसके मुंह से बरबस ही निकल गया....शानदार, अद्भुत! हाल में इंडिया गेट पर तीन दिन तक चले लाइट शो में आसमान में ड्रोन्स के द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संघर्ष गाथा को लोग टकटकी लगाए देखते रह गए । उन्नत तकनीक, रंगों और संगीत के बेमिसाल तालमेल से लैस, यह ड्रोन लाइट शो दर्शकों में देशभक्ति का संचार और टेक्नोलॉजी पर हैरानी उजागर करते है।

थ्रीडी कोरियोग्राफी के लिए रिकन्फिगरेबल स्वार्मिंग सिस्टम डिजाइन किया जाता है। इसकी मदद से ही ड्रोन अलग अलग आकृतियां बना पाते हैं। ऐसे ऐतिहासिक क्षणों के पीछे आइआइटी दिल्ली के स्टार्टअप बॉटलब डायनामिक्स के सदस्यों की कई दिनों की कड़ी मेहनत होती है .

आज “वैज्ञानिक और उनके अनोखे कर्मक्षेत्र" (I am a scientist and this where I work) श्रृंखला में आइये बात करते हैं बॉटलब डायनामिक्स की संस्थापक सरिता अहलावत से, और उनसे विज्ञान की इस तकनीक का विवरण लेते हैं।